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                                  संस्थापक गण

यशदेव शल्य ( 1928-       )

संगम लाल पांडेय ( 1929-2002)

                                 अध्यक्षीय


अखिल भारतीय दर्शन-परिषद् के इतिहास में वर्ष 2016 अविस्मरणीय वर्ष है। स्यात् 1956 में प्रथम पंजीयन के समय संस्थापकों को उतना हर्ष नहीं हुआ होगा जितना उनके उत्तराधिकारियों को 2016 में हुआ। कालक्रम में नवीनीकरण न होने के कारण 1956 का पंजीयन समाप्त हो गया। 2010 में जबलपुर में पुनः पंजीयन हुआ परन्तु ’दर्शन - परिषद्’ नाम से, जो खटकता भी था और परिषद् का वास्तविक स्वरूप भी प्रकाशित नहीं कर पा रहा था। अथक प्रयास से अंततः परिषद् को 17.10.2016 को अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस मिल गई जब पुनः इसी नाम से पंजीयन हुआ।
राष्ट्रभाषा के माध्यम से दर्शन की चर्चा करने वाली सर्वाधिक आजीवन सदस्यों वाली संस्था है - अखिल भारतीय दर्शन-परिषद्। 1954 में त्रैमासिक ’दार्शनिक’ पत्रिका के प्रकाशन के साथ परिषद् की नींव पड़ी। प्रथम वार्षिक अधिवेशन 26-27 फरवरी 1956 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुआ। तब से अब तक 61 अधिवेशन संपन्न हो चुके हैं । 61 वां अधिवेशन दर्शन विभाग पटना विश्वविद्यालय के आतिथेय में 10-12 सितम्बर, 2016 तक सपन्न हुआ।
’दार्शनिक’ त्रैमासिक को राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्त्रोत संस्थान, नई दिल्ली ने 02 मार्च 2009 को ISSN प्रदान किया जिसका क्रमांक है -0974-8849। श्री यशदेव शल्य जी के नेतृत्व में चैदह ग्रन्थों का प्रकाशन पूर्व में हो चुका था। 2000 के बाद लगभग 30 ग्रंथ प्रकाशित हुए हैं । परिषद् के समस्त पदाधिकारी अकादमिक बाध्यता का निर्वाह करते हुए बिना स्थायी स्थापना के मानसेवी ढंग से परिषद् के क्रियाकलापों में संलग्न रहते हैं । वार्षिक अधिवेशन अवसर पर स्तरीय ग्रन्थों को पुरस्कार प्रदान करना, ख्यातिलब्ध विद्वानों द्वारा विभिन्न व्याख्यानमालाओं में व्याख्यान देना, छात्रों हेतु अनेक निबन्ध तथा शोध-पत्र पुरस्कार एवं विभिन्न प्रकृति की दो संगोष्ठियों का आयोजन प्रमुख होता है। परिषद् की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि गैर-अकादमिक व्यक्ति एवं संस्थाएॅं भी लगातार आकृष्ट होकर परिषद् से समन्वय बना रही हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय क्षितिज पर परिषद् FISP से 1993 से पूर्णकालिक सदस्य के रूप में जुड़ी हुई हैै। FISP प्रति पांच वर्ष पर विश्व दार्शनिक महासभा का आयोजन करती है। 2008 में तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. एस.पी. दुबे ने सियोल (द. कोरिया) में आयोजित विश्व दार्शनिक महासभा में सम्मिलित हुए थे। 2013 में प्रो. दुबे का निधन हो गया। 2013 में परिषद् के लगभग दर्जनभर सदस्यों ने एथेंस की (WCP) विश्व दार्शनिक महासभा में भाग लिया था। सन् 2014 मेें स्वामी नारायण मंदिर लंदन में अंतरिम अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। आगामी महासभा 2018 में बीजिंग में प्रस्तावित है। बेबसाइट की दिशा में यह तीसरा प्रयास है। दर्शन जगत् के पार्षद इसके गुणदोष से अवगत कराते रहेंगे।